सूर्य ग्रहण के अवसर पर हरकी पौड़ी पर भीड़ जुटी

हरिद्वार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइन स्पष्ट होनी चाहिए


900 वर्ष पश्चात आए सूर्य ग्रहण के अवसर पर एक दिन पूर्व शनिवार शाम को ही श्रद्धालुओ की भीड़ हरिद्वार मे जुटना शुरू हो गयी । बड़ी संख्या में आए लोग जैसे- तैसे धर्मशाला होटलों में ठहर गए क्योंकि मौसम का मिजाज बिगड़ रहा था ।आखिर कहीं तो उनको ठहरना ही था परंतु यह बात पुलिस को नागवार गुजरी और उन्होंने आनन-फानन धर्मशालाएं आश्रम खाली करवा लिए । आखिर वही हुआ जिसकी संभावना थी आधी रात को तेज बारिश,तेज हवा (तूफान) जैसी स्थिति बन गई । आप कल्पना करें कि क्या गुजरी होगी उन यात्रियों , श्रद्धालुओं पर। इतनी संख्या में दिल्ली -हरियाणा आदि से फोरव्हीलर कैसे आये ? क्या उन्हें उत्तराखंड की सीमा पर नहीं रोका जाना चाहिए था ? यात्रियों की परेशानी और पुलिस की सिरदर्दी दोनों बातें नहीं होनी चाहिए। ऐसे त्योहारों पर गाइडलाइन स्पष्ट होनी चाहिए । होटल व्यवसाय से जुड़े लोग इस बात से परेशान है कि पिछले मार्च से अब तक कोई  काम हुआ नहीं और आगे भी कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही ,ऐसे में होटल व्यवसाय चौपट हो गया है। इन सब परेशानियों के बावजूद भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया अपने इष्ट देव को याद करते हुए सूर्य ग्रहण के अवसर पर दान पुन कर पुण्य कमाया। हर की पौड़ी पर स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्शाती है कि कोरोना वायरस का कोई भय नहीं है।


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